दीवारें जिन में रंग अभी बाकी हैं
हर ईंट बीते वक्त की कहानी इक सुनाती है
आवाज़ें कुछ अभी भी सुनाई देती हैं हर कोने में
पर अब खामोशी इस खंडहर में ज़रा ज़ोर से चिल्लाती है
धूल जमी थी तस्वीरों पर, कोशिश की हटाने की
धूल ही है शायद, कि हर तस्वीर से आँखें धुंधला सी जाती हैं
क्या है ये खंडहर? रुका सा दिल, बिखरा सा घर? एक ज़माने में छूटा अधूरा सफर?
हर सांस पे दिल के खालीपन से, कई बातें ज़ेहन में उतर आती हैं
दीवारें जिन में रंग अभी बाकी हैं
हर ईंट बीते वक्त की कहानी इक सुनाती है
हर वो चीज़ जो पीछे रह जाती है
अपने साथ जुडी एक याद तो छोड़ ही जाती है
आगे बढ़ा था, ख्यालों के उस कल के लिए
या शायद किसी मुश्किल, एक पहेली, कुछ सवालों के हल के लिए
पर वक्त के साथ, वो कल, वो हल, वो खाली हर चीज़ अपने मायने खो जाती है
हम बढ़ते तो आगे हैं, पर ख़ुशी पीछे छोटे मोड़ पर नज़र आती है
वक्त है जनाब, और ज़िन्दगी, ये कहाँ रुकेंगे
पर हर आगे लिए हुए कदम पर पीछे कुछ मंज़र तो ज़रूर दिखेंगे
न बढ़ेंगे साथ इनके तो खुद ही से थक जायेंगे
और जो बढ़ते रहे कदम, तो रास्ते भी खुद ही बनते जायेंगे

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